IMD Weather News: उत्तर भारत में मौसम ने एक बार फिर अचानक करवट ले ली है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी शुरू हो गई है, वहीं राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली समेत कई मैदानी इलाकों में बारिश का सिलसिला देखने को मिल रहा है। इस बदले हुए मौसम ने जहां ठंडक बढ़ा दी है, वहीं लोगों को शुष्क सर्दी से भी राहत मिली है। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों तक यह मौसमी गतिविधि जारी रह सकती है, जिससे तापमान में और गिरावट आने की संभावना है।
समुद्र से उठी नमी और बादलों की व्यापक हलचल
अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी युक्त हवाओं ने उत्तर-पश्चिम भारत की ओर रुख किया है। इन हवाओं के कारण वातावरण में नमी बढ़ गई है और बादलों की आवाजाही तेज हो गई है। इसका असर जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से लेकर राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली तक साफ तौर पर देखा जा रहा है। आसमान में घने बादल छाए हुए हैं और कई जगहों पर रुक-रुक कर बारिश हो रही है।
यह नमी सर्दियों के मौसम में काफी अहम मानी जाती है। बारिश से जहां वायु प्रदूषण में कमी आती है, वहीं मिट्टी में नमी बढ़ने से रबी फसलों को भी लाभ मिलता है। किसानों के लिए यह बारिश प्राकृतिक सिंचाई की तरह काम कर रही है, जिससे गेहूं, सरसों और चने जैसी फसलों की पैदावार बेहतर होने की उम्मीद है।
अगले 24 घंटों में और तेज होंगी मौसमी गतिविधियां
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अगले 24 घंटों में बारिश और बर्फबारी की तीव्रता और बढ़ सकती है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी हिमपात की संभावना जताई गई है। यह बर्फबारी 23 जनवरी की रात से शुरू होकर 24 और 25 जनवरी तक जारी रह सकती है। ऐसे में पहाड़ी इलाकों में सड़कें फिसलन भरी हो सकती हैं और यातायात प्रभावित होने की आशंका है।
दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में बारिश के साथ ओलावृष्टि की आशंका
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के कई हिस्सों में बारिश का दौर तेज हो सकता है। कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश और ओलावृष्टि की भी संभावना है। ओले गिरने से फसलों और खुले में खड़े वाहनों को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है।
उत्तर प्रदेश में पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ेगा बारिश का असर
उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और मध्य जिलों में मौसम में हलचल तेज होती नजर आ रही है। मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बरेली और आसपास के क्षेत्रों में पहले से हल्की बारिश दर्ज की जा रही है। आने वाले समय में यहां बारिश की तीव्रता बढ़ सकती है। यह बारिश गन्ना और गेहूं की फसलों के लिए बेहद फायदेमंद मानी जा रही है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश तक पहुंचेगा बारिश का सिस्टम
24 जनवरी तक यह वर्षा प्रणाली धीरे-धीरे पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ सकती है। वाराणसी, प्रयागराज और आसपास के इलाकों में भी बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। पूर्वी यूपी में आमतौर पर सर्दियों में कम बारिश होती है, ऐसे में यह बदलाव मौसम के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी दिखेगा मौसम का असर
राजस्थान के कई हिस्सों में भी बारिश के संकेत मिल रहे हैं। जयपुर, अजमेर, अलवर और आसपास के जिलों में बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। सर्दियों में राजस्थान में बारिश कम होती है, लेकिन पश्चिमी विक्षोभ के कारण ऐसा होना संभव हो पाता है। यह बारिश भूजल स्तर बढ़ाने और मिट्टी की नमी बनाए रखने में मददगार साबित हो सकती है।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर संभाग में भी मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। यहां बहुत तेज बारिश की संभावना नहीं है, लेकिन ग्वालियर, मुरैना, भिंड और शिवपुरी जैसे जिलों में हल्की बौछारें पड़ सकती हैं। यह बारिश चना, गेहूं और सरसों की फसलों के लिए लाभकारी मानी जा रही है।
दक्षिण भारत में तमिलनाडु में भी बदलेगा मौसम
उत्तर भारत के साथ-साथ दक्षिण भारत में भी मौसम में हल्का बदलाव देखने को मिल सकता है। तमिलनाडु में 25 जनवरी तक कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है। तटीय और आंतरिक जिलों में बादल छाए रहेंगे और रिमझिम बारिश से मौसम सुहावना हो सकता है। यह वर्षा राज्य की जल आपूर्ति के लिए अहम मानी जा रही है, खासकर उन इलाकों में जहां पानी की कमी बनी रहती है।
25-26 जनवरी को मिलेगा थोड़ी राहत, फिर आएगा नया विक्षोभ
मौसम विभाग के मुताबिक 25 और 26 जनवरी को उत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश और बर्फबारी की गतिविधियों में थोड़ी कमी आ सकती है। इस दौरान मौसम अपेक्षाकृत शांत रह सकता है और कुछ जगहों पर आसमान साफ भी हो सकता है। हालांकि यह राहत ज्यादा समय तक नहीं टिकेगी।
27-28 जनवरी को फिर बिगड़ सकता है मौसम
27 और 28 जनवरी को एक नया और शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है। इसके असर से हिमालयी क्षेत्रों में एक बार फिर भारी बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश का नया दौर शुरू होने की संभावना है। लगातार हो रही इन मौसमी गतिविधियों का असर जनजीवन और कृषि दोनों पर पड़ेगा।
पूर्वी और मध्य भारत में बना रहेगा शुष्क मौसम
जहां उत्तर और पश्चिम भारत में मौसम सक्रिय है, वहीं पूर्वी और मध्य भारत के कई राज्यों में मौसम शुष्क बना रहने का अनुमान है। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में फिलहाल बारिश की कोई संभावना नहीं है। यहां दिन में हल्की धूप रहेगी, जबकि सुबह और रात के समय ठंड और कोहरा परेशान कर सकता है।
जरूरी सावधानियां और तैयारी
मौसम में आए इस बदलाव को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा करने वालों को मौसम की जानकारी लेकर ही निकलना चाहिए और जरूरी सामान साथ रखना चाहिए। मैदानी इलाकों में रहने वाले लोगों को बारिश और ओलावृष्टि से बचाव के उपाय करने चाहिए। किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा पर ध्यान देना होगा, जबकि पशुपालकों को पशुओं को ठंड और बारिश से बचाने की व्यवस्था करनी चाहिए। इस तरह थोड़ी सी सावधानी से इस बदलते मौसम के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।









