अगले 72 घंटे भारी बारिश और बर्फीली हवाओं का कहर, शीतलहर का रेड अलर्ट जारी IMD Weather Alert

By Shruti Singh

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IMD Weather Alert

IMD Weather Alert: देश के कई हिस्सों में मौसम ने अचानक तीखा रुख अख्तियार कर लिया है। भारतीय मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले 72 घंटे अत्यंत संवेदनशील रहने वाले हैं। इस दौरान तेज बारिश, बर्फीली हवाएं और शीतलहर का व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है। मौसम में यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने और उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाओं के तेज बहाव के कारण हुआ है। विभाग के अनुसार, कई राज्यों में तापमान सामान्य से काफी नीचे गिर सकता है, जिससे जनजीवन, यातायात और स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।

पश्चिमी विक्षोभ के कारण बदला मौसम का मिजाज

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत के मौसम को प्रभावित कर रहा है। इसके चलते नमी युक्त हवाएं मैदानी इलाकों तक पहुंच रही हैं, जिससे बारिश और ठंड दोनों का असर बढ़ गया है। वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में यही सिस्टम भारी बर्फबारी का कारण बन सकता है। IMD ने स्पष्ट किया है कि यह स्थिति अगले तीन दिनों तक बनी रह सकती है, इसलिए लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।

उत्तर भारत में ठंड, बारिश और तेज हवाओं का असर

उत्तर भारत के कई राज्यों में मौसम ने अचानक करवट ली है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर में रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही तेज और ठंडी हवाएं चलने से शीतलहर की स्थिति और गंभीर हो सकती है। दिन के समय भी ठंड का अहसास बढ़ेगा, जबकि रात का तापमान और नीचे जाने की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में दृश्यता कम होने और सड़कों पर फिसलन बढ़ने से दुर्घटनाओं का खतरा भी बना हुआ है।

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बच्चों और बुजुर्गों के लिए बढ़ी परेशानी

मौसम विभाग ने विशेष रूप से स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है। ठंडी हवाओं और बारिश के कारण शरीर का तापमान तेजी से गिर सकता है, जिससे स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं। अनावश्यक बाहर निकलने से बचने और गर्म कपड़ों का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

पहाड़ी राज्यों में भारी बर्फबारी का अलर्ट

हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए IMD ने भारी बर्फबारी की चेतावनी जारी की है। ऊंचाई वाले इलाकों में लगातार बर्फ गिरने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हो सकता है। कई स्थानों पर सड़कें बंद होने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और संचार सेवाओं में रुकावट की आशंका जताई गई है। प्रशासन ने पहले से ही मशीनरी और राहत दलों को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।

पर्यटकों के लिए खास सलाह

मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों से अपील की है कि वे मौसम के सामान्य होने तक पहाड़ी इलाकों की यात्रा स्थगित कर दें। अचानक बर्फबारी और खराब मौसम के कारण फंसने का खतरा बढ़ सकता है। स्थानीय निवासियों को भी सुरक्षित स्थानों पर रहने और आवश्यक वस्तुओं का भंडारण पहले से करने की सलाह दी गई है।

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शीतलहर से स्वास्थ्य पर पड़ सकता है असर

तेज ठंडी हवाओं और गिरते तापमान के कारण शीतलहर का प्रभाव अब स्वास्थ्य पर भी साफ नजर आने लगा है। चिकित्सकों के अनुसार, इस मौसम में सर्दी, खांसी, फ्लू, निमोनिया और सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और हृदय या फेफड़ों की बीमारी से ग्रसित लोगों को अतिरिक्त सतर्क रहने की आवश्यकता है।

ठंड से बचाव के लिए जरूरी उपाय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोग गर्म कपड़े पहनें, सिर और कान ढककर रखें और ठंडे वातावरण में लंबे समय तक रहने से बचें। पर्याप्त मात्रा में गर्म तरल पदार्थ जैसे चाय, सूप और गुनगुना पानी लेने से शरीर को गर्म रखने में मदद मिलती है। संतुलित आहार और नियमित आराम भी ठंड के प्रभाव को कम कर सकता है।

यातायात और दैनिक जीवन पर पड़ सकता है असर

खराब मौसम के कारण सड़क, रेल और हवाई यातायात प्रभावित होने की संभावना है। बारिश और बर्फबारी से फिसलन बढ़ने के कारण पहाड़ी सड़कों पर आवागमन बाधित हो सकता है। वहीं मैदानी इलाकों में कोहरा और कम दृश्यता के चलते ट्रेनों और उड़ानों में देरी हो सकती है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले मौसम और यातायात से जुड़ी ताजा जानकारी अवश्य जांच लें।

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प्रशासन और नागरिकों के लिए आवश्यक सतर्कता

IMD के रेड अलर्ट के बाद सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। आपदा प्रबंधन टीमें सक्रिय कर दी गई हैं और स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे समय-समय पर मौसम से जुड़ी अपडेट जनता तक पहुंचाएं। नागरिकों से अपील की गई है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें और अफवाहों पर भरोसा न करें।

किसानों के लिए विशेष निर्देश

किसानों को सलाह दी गई है कि वे फसलों की सुरक्षा के लिए उचित प्रबंध करें। बारिश और पाले से फसलों को नुकसान हो सकता है, इसलिए खेतों में जल निकासी और पशुओं के लिए गर्म आश्रय की व्यवस्था जरूरी है। समय पर सावधानी बरतकर नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

निष्कर्ष

आने वाले 72 घंटे देश के कई हिस्सों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं। भारी बारिश, बर्फबारी और शीतलहर के इस दौर में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना, अनावश्यक यात्रा से बचना और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना इस समय बेहद जरूरी है। सही जानकारी और समय पर तैयारी से इस खराब मौसम के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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