आज से लागू हुए नए रेट, जानिए कौन सा सामान हुआ सस्ता और क्या हुआ महंगा GST Rate 2026

By Shruti Singh

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GST Rate 2026

GST Rate 2026: GST Rate 2026 को लेकर जनवरी की शुरुआत से ही सोशल मीडिया, यूट्यूब और कुछ न्यूज़ पोर्टलों पर लगातार दावे किए जा रहे हैं कि “आज से नई जीएसटी दरें लागू हो गई हैं” और कई जरूरी चीजों के दाम बदल गए हैं। ऐसे समय में जब महंगाई पहले से ही आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रही है, टैक्स से जुड़ी कोई भी खबर लोगों की चिंता बढ़ा देती है। लेकिन सच्चाई यह है कि जनवरी 2026 में कोई नई जीएसटी दरें लागू नहीं हुई हैं। जो बदलाव लोगों को महसूस हो रहे हैं, वे वास्तव में अक्टूबर 2025 में लागू किए गए GST 2.0 सुधारों का असर हैं। इस लेख में हम GST Rate 2026 की वास्तविक स्थिति, सस्ते और महंगे हुए सामान, और सरकार के उद्देश्य को विस्तार से समझेंगे।

GST Rate 2026 में वास्तव में क्या बदला है

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि 18 जनवरी 2026 से कोई नई GST दरें लागू नहीं की गई हैं। वर्तमान में जो टैक्स ढांचा देश में चल रहा है, वह अक्टूबर 2025 में जीएसटी परिषद द्वारा मंजूर किए गए GST 2.0 सुधारों पर आधारित है। इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य जीएसटी के जटिल स्ट्रक्चर को सरल बनाना था। पहले जीएसटी में 0%, 5%, 12%, 18% और 28% जैसे कई स्लैब मौजूद थे, जिससे व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों को भ्रम होता था।

GST 2.0 के तहत सरकार ने कोशिश की कि ज्यादातर वस्तुओं और सेवाओं को दो मुख्य स्लैब – 5% और 18% – में समाहित किया जाए। इससे टैक्स सिस्टम ज्यादा पारदर्शी और समझने में आसान बना। हालांकि कुछ खास वस्तुओं और सेवाओं के लिए 0%, 3%, 0.25%, 28% और कुछ मामलों में 40% तक की विशेष दरें अब भी लागू हैं।

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GST Rate 2026 के प्रमुख टैक्स स्लैब

0% GST स्लैब: रोजमर्रा की जरूरी चीजें

GST Rate 2026 में 0% टैक्स स्लैब आम जनता के लिए सबसे ज्यादा राहत देने वाला है। इस श्रेणी में चावल, गेहूं, आटा, दालें, ताजे फल और सब्जियां, दूध, अंडे जैसी बुनियादी जरूरत की चीजें शामिल हैं। इन पर कोई जीएसटी नहीं लगता, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को सीधा फायदा मिलता है। सरकार की मंशा साफ है कि जरूरी खाद्य पदार्थ महंगाई से दूर रहें।

5% GST स्लैब: जरूरी लेकिन प्रोसेस्ड सामान

5% जीएसटी स्लैब में वे वस्तुएं आती हैं जो रोजमर्रा में इस्तेमाल तो होती हैं, लेकिन किसी न किसी रूप में प्रोसेस्ड होती हैं। इसमें पैकेज्ड अनाज, चाय, चीनी, बिस्किट, खाद्य तेल, घरेलू एलपीजी सिलेंडर और कई FMCG उत्पाद शामिल हैं। GST 2.0 सुधारों के बाद इस स्लैब का दायरा बढ़ाया गया है ताकि आम लोगों का मासिक खर्च कम हो सके।

18% GST स्लैब: अधिकांश उपभोक्ता और सेवाएं

18% जीएसटी स्लैब को अब “स्टैंडर्ड स्लैब” माना जा रहा है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, फर्नीचर, मोबाइल, टीवी, रेफ्रिजरेटर, होटल सेवाएं, आईटी और प्रोफेशनल सर्विसेज जैसी अधिकतर वस्तुएं और सेवाएं आती हैं। सरकार का उद्देश्य है कि ज्यादातर गैर-जरूरी लेकिन आम उपयोग की चीजें इसी एक स्लैब में रहें।

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28% या उससे अधिक टैक्स: लग्जरी और हानिकारक वस्तुएं

28% या 40% तक का टैक्स उन वस्तुओं पर लगाया जाता है जिन्हें लग्जरी या सेहत के लिए नुकसानदायक माना जाता है। इसमें महंगी कारें, बड़ी बाइक, तंबाकू, सिगरेट, पान मसाला और कुछ लक्जरी आइटम शामिल हैं। इन पर अतिरिक्त सेस भी लगाया जाता है ताकि राजस्व बढ़ाया जा सके और खपत को हतोत्साहित किया जा सके।

GST Rate 2026 से किन चीजों पर मिली राहत

GST 2.0 सुधारों के बाद कई रोजमर्रा की वस्तुएं सस्ती हुई हैं, जिससे आम लोगों को राहत मिली है। साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, डिटर्जेंट जैसे FMCG प्रोडक्ट पहले 18% जीएसटी के दायरे में आते थे, लेकिन अब इन्हें 5% स्लैब में शामिल कर दिया गया है। इसका असर सीधे घरेलू बजट पर पड़ा है और महीने के खर्च में कुछ बचत हो रही है।

इसी तरह मिड-रेंज कपड़े और जूते, जिन पर पहले 12% या 18% टैक्स लगता था, अब ज्यादातर मामलों में 5% जीएसटी के अंतर्गत आ गए हैं। पैकेज्ड फूड आइटम जैसे बिस्किट, चाय और चीनी भी इसी श्रेणी में आते हैं। इसके अलावा छोटी और मध्यम साइज की कारों तथा 350 सीसी तक की बाइकों पर टैक्स में राहत से ऑटो सेक्टर में कीमतें कुछ हद तक कम हुई हैं।

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GST Rate 2026 में किन चीजों पर बढ़ा बोझ

जहां जरूरी सामान पर टैक्स कम किया गया है, वहीं कुछ वस्तुएं और सेवाएं अब भी महंगी हैं या पहले से ज्यादा महंगी महसूस हो रही हैं। सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर 28% जीएसटी के साथ-साथ भारी सेस लगाया जाता है। सरकार इन्हें स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मानती है, इसलिए इन पर ऊंचा टैक्स लगाया गया है।

शराब और पान मसाला जीएसटी के दायरे से बाहर या उच्च टैक्स ढांचे में आते हैं, इसलिए इनकी कीमतों में कोई खास कमी नहीं आई है। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर पर टैक्स बढ़ने से होटल, ढाबा और छोटे व्यवसायियों की लागत बढ़ी है, जिसका असर ग्राहकों पर भी पड़ता है। इसके अलावा महंगी हाउसिंग सोसायटियों के मेंटेनेंस चार्ज पर जीएसटी लगने से बड़े फ्लैट मालिकों का मासिक खर्च बढ़ गया है।

GST Rate 2026 की खास बातें

GST Rate 2026 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि टैक्स स्लैब की संख्या को कम करके सिस्टम को सरल बनाया गया है। अब मुख्य रूप से 5% और 18% स्लैब पर जोर दिया जा रहा है, जिससे टैक्स कैलकुलेशन और अनुपालन आसान हुआ है। जरूरी खाद्य पदार्थों को 0% टैक्स में रखकर सरकार ने गरीब और मध्यम वर्ग को महंगाई से राहत देने की कोशिश की है। वहीं लग्जरी और हानिकारक वस्तुओं पर ऊंचा टैक्स लगाकर राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ स्वास्थ्य को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

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GST Rate 2026 का उद्देश्य और आगे की दिशा

GST Rate 2026 के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य टैक्स सिस्टम को सरल, पारदर्शी और जनहितैषी बनाना है। जीएसटी परिषद की मंशा है कि आम जनता की रोजमर्रा की जरूरतें सस्ती रहें और गैर-जरूरी या नुकसानदायक चीजों से ज्यादा टैक्स वसूला जाए। इससे महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है और सरकार को विकास कार्यों के लिए जरूरी राजस्व भी मिलता है।

भविष्य में 12% स्लैब को पूरी तरह खत्म करने की योजना पर भी चर्चा चल रही है, जिससे टैक्स ढांचा और ज्यादा आसान हो सकता है। अनाज, दाल, आटा और खाद्य तेल जैसी जरूरी चीजों पर 0% जीएसटी बनाए रखने का लक्ष्य है ताकि आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। जीएसटी दरें और नियम समय-समय पर सरकार और जीएसटी परिषद के निर्णय के अनुसार बदल सकते हैं। किसी भी वित्तीय या व्यावसायिक निर्णय से पहले आधिकारिक जीएसटी नोटिफिकेशन या विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

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