Cement Sariya Rate Today: अगर आप लंबे समय से अपना घर बनाने की योजना बना रहे थे लेकिन बढ़ती लागत की वजह से रुक गए थे, तो साल 2026 आपके लिए राहत भरी खबर लेकर आया है। इस साल निर्माण सामग्री जैसे सीमेंट, सरिया, बालू, गिट्टी और ईंटों के दामों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। सरकार की नई नीतियों, टैक्स में बदलाव और बाजार में सप्लाई बढ़ने से अब घर बनाना पहले के मुकाबले काफी सस्ता हो गया है। खासकर मध्यम वर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए यह बदलाव किसी सुनहरे मौके से कम नहीं है।
पहले निर्माण सामग्री के महंगे होने के कारण लोग या तो घर बनाने की योजना टाल देते थे या फिर छोटे और अधूरे निर्माण से काम चलाते थे। लेकिन अब स्थिति बदल रही है। जीएसटी में संशोधन, सरकारी आवास योजनाओं और उत्पादन में तेजी के चलते कुल निर्माण लागत में लगभग 10 से 20 प्रतिशत तक की कमी आई है। ऐसे में जो लोग 2026 में घर बनाने का सपना देख रहे हैं, उनके लिए यह सही समय माना जा रहा है।
2026 में सीमेंट, सरिया और बालू के नए दाम
साल 2026 की शुरुआत के साथ ही निर्माण सामग्री के औसत बाजार रेट में गिरावट देखने को मिली है। बढ़ी हुई उत्पादन क्षमता और मांग में संतुलन के कारण कीमतें स्थिर और किफायती बनी हुई हैं। नीचे दिए गए रेट जनवरी 2026 के औसत बाजार भाव को दर्शाते हैं।
सीमेंट (50 किलो बोरी) की कीमत लगभग 350 से 360 रुपये के बीच चल रही है।
सीमेंट (प्रति टन) का रेट करीब 6,500 से 6,800 रुपये है।
सरिया (10 मिमी, प्रति टन) लगभग 54,000 से 56,000 रुपये में उपलब्ध है।
सरिया (8 मिमी, प्रति किलो) की कीमत 54 से 56 रुपये के बीच है।
बालू (प्रति घन फुट) का भाव 28 से 32 रुपये के आसपास है।
मौरंग की कीमत 60 से 62 रुपये प्रति घन फुट है।
गिट्टी 62 से 65 रुपये प्रति घन फुट में मिल रही है।
ईंट (प्रति हजार) की कीमत 7,500 से 8,000 रुपये के बीच बनी हुई है।
बड़े महानगरों में इन दामों में थोड़ा फर्क हो सकता है, जबकि छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में यही सामग्री 5 से 10 प्रतिशत तक सस्ती मिल जाती है। फिलहाल बाजार में मांग नियंत्रित रहने से दामों में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं देखा जा रहा है।
सरकार की कौन-कौन सी योजनाएं दे रही हैं राहत
निर्माण सामग्री के सस्ते होने के पीछे सरकार की कई अहम योजनाएं और फैसले हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण और शहरी) के तहत सस्ते घरों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना के जरिए पात्र लाभार्थियों को घर निर्माण के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है, जिससे सीमेंट, सरिया और अन्य सामग्री की लागत कम पड़ती है।
2025-26 के बजट में जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाते हुए सीमेंट पर टैक्स घटाया गया, जिससे सीधा असर कीमतों पर पड़ा। इसके अलावा प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत छोटे स्तर पर लोन की सुविधा दी जा रही है, जिससे लोग आसानी से निर्माण कार्य शुरू कर पा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ भारत मिशन और आवास योजनाओं को जोड़कर अतिरिक्त लाभ भी दिया जा रहा है।
राज्य सरकारें भी अपने स्तर पर सहयोग कर रही हैं। कई राज्यों में स्थानीय सब्सिडी, सस्ती बालू उपलब्ध कराने की योजनाएं और ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम लागू किए गए हैं, जिससे कालाबाजारी पर रोक लगी है।
निर्माण के लिए सरकार से मिलने वाली अन्य मदद
सरकार सिर्फ सामग्री के दाम कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि होम लोन पर ब्याज में छूट और सब्सिडी भी दे रही है। पीएम आवास योजना के तहत बिना गारंटी के लोन की सुविधा और ब्याज सब्वेंशन से लोगों का बोझ काफी कम हो गया है।
इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए एम-सैंड (मैन्युफैक्चर्ड सैंड) को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो पारंपरिक नदी बालू के मुकाबले सस्ता और पर्यावरण के लिए सुरक्षित है। इससे बालू की कमी दूर हुई और कीमतें नियंत्रित रहीं।
घर बनाने की कुल लागत में कितनी बचत हो रही है
अगर उदाहरण के तौर पर 1000 वर्ग फुट के एक घर की बात करें, तो पहले इसकी अनुमानित लागत 25 से 30 लाख रुपये तक पहुंच जाती थी। लेकिन 2026 के नए रेट लागू होने के बाद यही लागत घटकर लगभग 22 से 26 लाख रुपये के बीच आ गई है।
सीमेंट पर प्रति बोरी 10 से 15 रुपये की बचत हो रही है। सरिया पर प्रति टन 5,000 से 6,000 रुपये तक कम खर्च आ रहा है। बालू और गिट्टी के दाम घटने से भी कुल बजट में अच्छा खासा अंतर पड़ा है। कुल मिलाकर एक मध्यम वर्गीय परिवार को अपने घर के निर्माण में 10 से 12 प्रतिशत तक की सीधी बचत मिल रही है। ग्रामीण इलाकों में यह बचत और भी ज्यादा हो सकती है।
नए रेट लागू होने के पीछे की वजह
2025 के अंत में बाजार में आई मंदी और निर्माण परियोजनाओं की गति धीमी होने से कीमतों में गिरावट शुरू हुई थी। इसके बाद 2026 के बजट में टैक्स सुधार और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को बढ़ावा मिलने से उत्पादन बढ़ा। सप्लाई चेन मजबूत हुई और कच्चे माल की उपलब्धता बेहतर हुई।
एम-सैंड को बढ़ावा देने और ई-टेंडरिंग सिस्टम लागू करने से पारदर्शिता बढ़ी, जिसका सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिला।
घर बनाते समय किन बातों का रखें ध्यान
सस्ते रेट का फायदा उठाने के साथ-साथ निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। हमेशा मानक प्रमाणन वाली सामग्री ही खरीदें। ठेकेदार के साथ लिखित समझौता करें और बजट पहले से तय कर लें।
पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाएं, पानी और बिजली की बचत पर ध्यान दें और सरकारी योजनाओं की जानकारी आधिकारिक पोर्टल से जरूर जांचें। सही प्लानिंग के साथ यह समय घर बनाने के लिए बेहद अनुकूल है।
पाठकों के लिए खास सुझाव
थोक में खरीदारी करने से अतिरिक्त छूट मिल सकती है।
स्थानीय डीलरों से कई कोटेशन लेकर तुलना करें।
सरकारी पोर्टल के जरिए बालू और अन्य सामग्री बुक करें।
सोलर रूफटॉप जैसी योजनाओं से भविष्य की लागत भी कम करें।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य बाजार रुझानों और सरकारी घोषणाओं पर आधारित है। निर्माण सामग्री के दाम क्षेत्र, मांग और सप्लाई के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। किसी भी निर्णय से पहले स्थानीय डीलर और आधिकारिक स्रोत से जानकारी की पुष्टि अवश्य करें।









